आलेख

प्रीति चौधरी

जश्ने ज़िन्दगी

जीवन एक उत्सव है जिसे हमें  हर्षोल्लास के साथ मनाना चाहिए। चाहे वह उम्र का कोई सा भी पड़ाव हो किंतु जीने का उत्साह और उमंग कम नहीं होनी चाहिए। वृद्ध मन में तो तरुणाई का मौसम हमें जवान रखना होगा क्योंकि मन के हारने से ही हार होती है। कहा भी गया है:  “मन […]

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सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ

जीवन का आरंभ जैसे उत्सव के साथ होता है, इसका अंत भी वैसे ही उत्साह और खुशी से क्यों न हो? पश्चिमी देशों में कुछ संगठन इसी उद्देश्य से मृत्यु के निकट पहुंचे लोगों के लिए एक उत्सव मनाते हैं जिसे “सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ” कहते हैं। यह एक तरह से जीवन के अंत से पहले

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जिंदगी को जश्न कैसे बनाएँ 

इस दुनिया में सब कुछ परिवर्तनशील है केवल एक अटल सत्य को छोड़ कर। वह सत्य है मृत्यु। मृत्यु अपनी हो या अपनों की, होती यह दुखदायी और डरावनी ही है। पर क्या करें? यह अटल सत्य जो है। तो क्यों न इसका स्वागत उसी तरह करें जैसा हम जीवन के शुरुआत यानि जन्म का

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‘पढ़ाई’क्या है और यह मस्तिष्क को कैसे प्रभावित करता है?

भारतीय दर्शन मस्तिष्क के विकास के पाँच स्तर या पक्ष की बात करता है। इन स्तरों को समझना अपनी बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने के लिए जरूरी है। ‘पढ़ना’ बौद्धिक क्षमता बढ़ाने का एक साधन है। डिजिटल या फिजिकल- दोनों माध्यमों की तुलना से पहले देखते हैं कि हमारा मस्तिष्क कार्य कैसे करता है। मौलिक प्रश्न

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प्रीति चौधरी

विचार करने की कला

विचार वही व्यक्ति गहनता से करता है जो अंतरात्मा की आवाज सुन लेता है। विचार करने की कला हर व्यक्ति के पास नहीं होती। विचार ही हृदय का दर्पण होते हैं। विचारों से ही व्यक्ति के मन की पावनता परिलक्षित होती है तथा उसके हृदय की मलिनता भी सामने आ जाती है।        अंतरात्मा की

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खुशियों की चाबी

 राजश्री राठी, गौरक्षण रोड, महेश‌ कॉलनी, अकोला, महाराष्ट्र पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है मानव जनम बहुत पुण्य के पश्चात मिलता है। मानव जीवन में ही मनुष्य मनचाहा लक्ष्य साध कर अपनी प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है, परमार्थ और जनकल्याण के अच्छे कार्यों को करते हुए अपने जीवन को सार्थक करने का

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भावना मयूर पुरोहित

आर्ट ऑफ थिंकिंग

भावना मयूर पुरोहित, हैदराबाद  आर्ट ऑफ थिंकिंग   अर्थात सोचने की कला। जैसी हमारी सोच वैसे हम!!! आचार्य विनोबा भावे की एक लघुकथा याद करते है… एक बार एक मानव चलते चलते, किसी वन में भटक गया। वह एक वृक्ष के नीचे बैठा गया था। उसे मालूम नहीं था कि वह एक कल्प वृक्ष था। इस वृक्ष के नीचे बैठकर

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आर्ट ऑफ थिंकिंग

मेरी एक मित्र है सुषमा। उसके नैन नक्श और शारीरिक बनावट अच्छी है लेकिन रंग साफ नहीं है। उसकी छोटी बहन का रंग गोरा है। छोटी बहन के स्वभाव और काम के कारण लोग उसकी प्रशंसा करते हैं। बचपन में जब सुषमा को घर के बड़े लोग किसी गलती पर डांटते तो उसे लगता वह

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