सेहतनामा

सेहतनामा

स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन कहा गया है क्योंकि धन कमाने और उसका उपयोग करने के लिए स्वस्थ रहना आवश्यक है। धन ही नहीं धर्म भी स्वस्थ शरीर के बिना नहीं हो सकता है। इसीलिए तो महाकवि कालीदास ने ‘कुमारसम्भव’ में कहा है “शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम्” अर्थात शरीर ही धर्म का पहला और उत्तम […]

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पॉपकॉर्न माइंड: एक नई महामारी

क्यों है चर्चा में पॉपकॉर्न माइंड? मानसिक स्वस्थ्य के क्षेत्र में आजकल एक शब्द चर्चा में है ‘पॉपकॉर्न ब्रेन’ या ‘पॉपकॉर्न माइंड’। दुनिया भर में पॉपकॉर्न ब्रेन के मरीजों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ती जा रही है कि कई स्टडी में इसे ‘महामारी’ की संज्ञा दी जाने लगी है। वर्तमान ‘ग्लोबल विलेज’ के युग

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वृद्धावस्था में व्यवहार में होने वाले परिवर्तन और उनके कारण

 चिड़चिड़ापन, झल्लाहट, क्रोध, कहीं मन नहीं लगना, उत्साह की कमी, दूसरों की खुशी के प्रति उदासीन रहना, खिन्नता इत्यादि व्यक्ति का स्वाभाविक गुण होता है, जो लगभग सभी व्यक्तियों में होता है, लेकिन इनकी मात्रा प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न-भिन्न होती है। यहाँ तक कि एक ही व्यक्ति में समय, स्थान, परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग हो

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बरसात में सेहतमंद रहने के लिए जरूरी है ये सावधानियाँ

बारिश का मौसम यूँ तो तपती धरती को सरोबर करने वाली रिमझिम फुहार का मौसम होता है, झुलसे पेड़-पौधों पर लहराती हरियाली का मौसम होता है, लेकिन साथ ही तरह-तरह की बीमारियों का भी मौसम होता है। साधारण सर्दी-जुकाम, बुखार, अस्थमा, त्वचारोग इत्यादि परेशानियाँ इस मौसम में आम होती है। स्वस्थ रहने पर ही रिमझिम

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बुजुर्गों में होने वाली सामान्य मनोवैज्ञानिक समस्याएँ

हम सब जब अपने जीवन चक्र की एक अवस्था या स्टेज से बढ़ते हुए जब दूसरे स्टेज में जाते हैं, तब हमारे शरीर और मस्तिष्क में कई परिवर्तन होता है। जैसे-जैसे हमारा शरीर वृद्ध होने लगता है इसके प्रत्येक अंग की क्षमता कम होने लगती है। वृद्धावस्था में होने वाले मानसिक परिवर्तन       इसका असर

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मानसिक स्वास्थ्य: वर्तमान समय की आवश्यकता

एक फिल्म अभिनेता के हालिया निधन ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया है। हर कोई बस पोस्ट कर रहा है। लोग इस तरह बातें कर रहें हैं जैसे वे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों का कितना ध्यान रखते हैं और जरूरत के समय उनके लिए उपलब्ध होते हैं। लेकिन सच बात तो यह है कि

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सेहतमंद होने का अर्थ

एक प्रसिद्ध कहावत है “यदि आपको अभी अपने स्वास्थ्य की देखभाल करने का समय नहीं मिला है, तो आपको बाद में अपनी बीमारी के लिए समय निकालने की आवश्यकता होगी।”       हमारे जीवनकाल में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली मशीन है हमारा शरीर। अन्य सभी मशीनों का इस्तेमाल इसी मशीन पर निर्भर है। इसलिए

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करोना काल में बुजुर्गों को अकेलेपन और अवसाद से कैसे बचाएँ

सब लिए चुनौतीपूर्ण है कोई भी इससे अछूता नहीं है लेकिन हमारे बुजुर्ग इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं। वे एक बड़े शारीरिक और मानसिक खतरे से जूझ रहें हैं। वे नौजवान पीढी की तरह तकनीकी के सहारे अपना दिन काटने के आदी तो हैं नहीं, ऐसे में यह अनिवार्य हो जाता है कि आप और

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