आध्यात्म

हनुमान जी सूर्य को कैसे निगल गए थे?

बाल समय रवि भक्षि लियो तब तिनहु लोक भयौ अँधियारा ….. युग सहस्त्र योजन पर भानु, लिल्यों ताही मधुर फल जानु …….. तुलसीदास जी के ऐसे पंक्तियों से जन सामान्य में एक धारणा बन गई है कि हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया था। तुलसी दास जी ने भी ये पंक्तियाँ अपने मन से […]

हनुमान जी सूर्य को कैसे निगल गए थे? Read More »

ये कैसी आस्था है?

मैं कई बार सड़कों के किनारे, पेड़ों के नीचे, नदियों के तट पर, रखे देवी-देवताओं की अनेक टूटी-फूटी, खंडित मूर्तियाँ, फोटो आदि देखती हूँ। आर्टिफ़िशियल फूल मालाएँ, माता की चुन्नी, भगवत नाम लिखा हुआ पटका या अंगवस्त्र इत्यादि भी होते हैं। शायद आपलोगों ने भी देखा हो। गाँव से अधिक शहरों में ऐसे दृश्य दिखते

ये कैसी आस्था है? Read More »

Scroll to Top