मित्रों! 8 मार्च को प्रतिवर्ष धूमधाम से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। महिलाओं की उपलब्धियों एवं सशक्तिकरण की बात की जाती है। निश्चय ही पिछले दो दशकों में महिलाओं ने अपनी योग्यता का प्रमाण दिया है। कभी घर के चूल्हे-चौके और घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली भारतीय नारी अब शिक्षित है। हर क्षेत्र में अपनी योग्यता का परिचय दे रही है। देश की प्रगति में अपना सहयोग दे रही है। आज जितनी तेजी से लैपटाप पर उसकी अंगुलियाँ थिरकती है उतनी ही सजगता से वह घर और परिवार की ज़िम्मेदारी भी निभा रहा है यानि घर और बाहर दोनों को संभालने की योग्यता रखती है आज की नारी।

निश्चय ही पिछले बीस वर्षों में नारी की दिशा और दशा दोनों बदली है। यह गर्व का विषय है कि देश के सर्वोच्च पद को भी एक महिला ही सुशोभित कर रही है। देश की राजधानी दिल्ली की मुख्यमंत्री का कार्यभार भी एक महिला संभाल रही है।
अब प्रश्न यह उठता है कि शिक्षा संस्थानों, बैंकों, अस्पतालों, सुरक्षा बलों, खेलों, आदि के क्षेत्र में अपनी योग्यता के बल पर उच्च पदों को सुशोभित करने वाली कुछ महिलाओं को देख कर क्या हम कह सकते हैं कि महिलाओं के प्रति पुरुष समाज की सोच बदली है? ‘नहीं।’ आज भी आए दिन बलात्कार एवं नारी शोषण की घटनाएँ घट रही है। गांवों-कस्बों में नारियों का शारीरिक एवं मानसिक शोषण जारी है। यह सब देख कर बहुत दुख होता है। देश के अनेक भागों में नारी की स्थिति आज भी दयनीय एवं सोचनीय है।
महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर जो कानून बनाए गए हैं वह खोखले नजर आते हैं। अधिकतर महिलाओं की पहुँच से न्याय का द्वारा कोसो दूर है। पुलिस थानों में शिकायत लिखवाने के लिए उसे संघर्ष करना पड़ता है। परिवार की बदनामी के डर से वह पुलिस स्टेशन तक भी नहीं पहुँच पाती या उसे अपने परिवार वालों से सहयोग नहीं मिलता। पति चाहे कितना भी शोषण करे, प्रताड़ित करे, उसे उसी पति के साथ निभाने का दवाब होता है।
यदि कोई स्त्री साहस करके कानून का दरवाजा खटखटाती भी है तो लंबी एवं जटिल न्यायिक प्रक्रिया उसे हताश और निराश कर देती है। बेचारी महीनों नहीं वर्षों तक न्याय को तरस जाती है।
अब प्रश्न उठता है कि नारी की दशा सुधारने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?
अधिक-से-अधिक शिक्षा का प्रचार-प्रसार
14 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को, जिनमें बेटियाँ भी शामिल हैं, निःशुल्क शिक्षा का सांवैधानिक अधिकार है। वृद्धि के बावजूद अभी भी निरक्षरता दर में महिला पुरुषों से कम है हालांकि यह अंतर कम हुआ है। शिक्षा में गुणवत्ता की कमी एक बड़ी समस्या है। सरकार ने इस क्षेत्र में अनेक योजनाएँ बनाई है। अब गांवों-कस्बों में भी अधिक-से-अधिक विद्यालय खोले जा रहे हैं। यदि कोई महिला भी पढ़ना चाहती है तो उसके लिए प्रौढ़ शिक्षा केंद्र हैं।
आर्थिक आत्मनिर्भरता
शहरों और गांवों- दोनों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सम्पन्न होने के लिए अधिक-से-अधिक रोजगार सृजन किया जाय।
सुरक्षा
महिला सुरक्षा के नियम और कड़े हों और अपराधियों को जल्द एवं कठोर सजा का प्रावधान हो।
समाज की सोच बदले
महिलाओं को घर एवं बाहर उचित सम्मान मिले। उनके स्वास्थ्य के प्रति भी परिवार जागरूक रहे।
स्वास्थ्य
सरकार ने महिलाओं के लिए छोटे शहरों में भी स्वास्थ्य केंद्र खोले हैं। इनकी संख्या और बढ़े एवं महिलाओं को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा मिले।
सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक-से-अधिक महिलाओं तक पहुंचे, ऐसी कामना करें।
अंत में, मैं यही कहूँगी हमारे देश की सभी महिलाएं सशक्त हों, सुरक्षित हो, और देश की प्रगति में पुरुषों कंधे से कंधे मिला कर सहयोग दे तभी हमारा देश प्रगति के पथ पर तेजी से आगे बढ़ेगा।

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