जीवन का आरंभ जैसे उत्सव के साथ होता है, इसका अंत भी वैसे ही उत्साह और खुशी से क्यों न हो? पश्चिमी देशों में कुछ संगठन इसी उद्देश्य से मृत्यु के निकट पहुंचे लोगों के लिए एक उत्सव मनाते हैं जिसे “सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ” कहते हैं। यह एक तरह से जीवन के अंत से पहले उसके लिए जश्न मनाने की तरह है।
उनका मानना है अपने किसी निकट संबंधी या मित्र के जाने के बाद उनके अंत को याद कर रोने से अच्छा है, उनके जीवन के अंत से पहले उनके सम्मान में आनंद से उनके जीवन का उत्सव मनाएँ ताकि उनके दुनिया से जाने के बाद भी उनकी सुखद यादें हमारे मन में रहे और खुशी की एक मीठी लहर दे जाएँ। जिनके जीवन के लिए यह उत्सव मनाया जाता है उनके शौक, उनके पसंद के अनुसार ऐसी सभी चीजें उन्हें उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है, जिनसे उन्हें खुशी मिल सके।

उनके ‘सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ’ की तैयारी के लिए 10 स्टेप वे लोग जरूरी मानते हैं:
1. उस व्यक्ति के जाने के बाद सबसे दुखी होने वाले लोगों यानि उनके निकट संबंधी और घनिष्ठ मित्रों का काउन्सलिन्ग इस तरीके से किया जाता है कि वे इसके लिए पहले से ही मानसिक रूप से तैयार रहें।
2. उसके निकट के लोगों से ऐसे सुझाव लेते हैं जिनसे मरणासन्न व्यक्ति को अच्छा महसूस हो।
3. उत्सव के लिए एक ऐसा बजट बनाते हैं जिससे उस व्यक्ति के अत्तराधिकारियों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव नहीं पड़े।
4. चौथे स्टेप के रूप में कार्यक्रम के लिए तारीख, स्थान और आगंतुक लोगों की सूची बनाई जाती है।
5. बजट और मरणासन्न व्यक्ति के पसंद के अनुसार खाने और पीने के चीजों की सूची बनाई जाती है।
6. इस कार्यक्रम को अधिक सार्थक बनाने के लिए संगीत, किताब पढ़ने और मरणासन्न व्यक्ति की पसंद के अनुसार कुछ वक्ताओं को भी बुलाया जाता है।
7. अच्छी यादों को सहेजने के लिए फोटो और वीडियो बनाने का इंतजाम किया जाता है।

8. कुछ ऐसे व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों को शामिल किया जाता है जिसके लिए वह व्यक्ति अपने जीवन में बहुत आसक्त (passionate) रहा हो। कार्यक्रम की रूपरेखा ऐसा रखा जाता है ताकि सब साथ मिल कर आनंद कर सकें, गा सके, और यहाँ तक कि अगर रोना हो, तो वो भी साथ कर सके।
9. कार्यक्रम स्थल की सजावट और ड्रेसकोड भी बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। इसमें उदासी नहीं बल्कि जीवन और उस व्यक्ति के पसंद की झलक हो।
10. कार्यक्रम का आयोजन। उपर्युक्त तैयारी कर कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
कार्यक्रम का उद्देश्य होता है मरणासन्न व्यक्ति को यह एहसास दिलाना कि वह उन सबके लिए कितना महत्त्वपूर्ण है। उसके अपने अभी भी उसके साथ हैं। साथ ही आनंद और सुख के सभी पलों को इस एक कार्यक्रम के द्वारा वह एक साथ याद कर सके। उसके जीवन के अंतिम पल सकारात्मक और आनंद भरे यादों में बीते न कि दुनिया से जाने के दुख में या रह गए कामों के अफसोस में।
अपने परिजनों को अंतिम विदाई देने का यह संभवतः एक अच्छा तरीका है क्योंकि मृत्यु को रोकना तो हमारे वश में नहीं है तो क्यों न उसे एक अच्छा रूप ही दे दिया जाय।
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