हिंदी हैं हम

भाषा भावों और विचारों की संवाहक होती है। भाषा का स्वरूप निरंतर बदलता रहता है। वर्तमान हिंदी का उद्भव 10वीं शताब्दी में संस्कृत भाषा से हुआ है। यह सब जानते हैं कि काल के अनुसार ही वह पाली, प्राकृत और अपभ्रंश की धारा से गुजरती हुई आज अपने वर्तमान रूप में हमारे सामने है। हिंदी को हिंदवी, हिंदुस्तानी और खड़ी बोली के रूप में भी जाना जाता है।

तरुणा पुण्डीर ‘तरुनिल’
नई दिल्ली

भारत गणराज्य में बोले जाने वाली यह राष्ट्रीय भाषा है। इसे विश्व में अंग्रेज़ी और स्पेनिश के बाद सबसे व्यापक रूप से बोले जाने वाली भाषा के रूप में स्थान दिया गया है। तथ्य यह है कि वैश्विक स्तर पर वही भाषा टिक पाएगी जिसमें औदात्य का गुण हो और हिंदी का यह सौभाग्य रहा है कि जितने भी विदेशी शासक भारत में राज्य करने आए हिंदी भाषा ने उन सभी की भाषा को प्रेम पूर्वक गले लगाया और यही कारण है कि हिंदी का कोश समृद्ध और संपन्न होता चला गया परन्तु यह भी कटु सत्य है की भाषा भारत में विवाद का विषय रही है।

स्वतंत्रता के बाद पाश्चात्य चकाचौंध और प्रभाव के कारण, शिक्षा का व्यवसायीकरण और भौतिकता की होड़ में भारत की युवा पीढ़ी का रोजगार और उच्च शिक्षा के कारण विदेशगमन बढ़ने से हिंदी के प्रति उदासीनता देखी गई और सबसे अधिक त्रासदी यह थी कि हिंदी या हिंदी भाषियों को हीन व हेय दृष्टि से देखा जाने लगा।

भारतवासी यह भूल बैठे की हिंदी वही भाषा थी जो आज़ादी के आंदोलन में जन-जन का शस्त्र बनी, हिंदी वही भाषा थी जिसने विश्व को विवेकानंद के समक्ष नतमस्तक कर दिया और हिंदी ही वह भाषा थी जिसका प्रशिक्षण अंग्रेजों ने भी अपने प्रशासनिक अधिकारियों को करवाया जिससे वे 200 वर्ष तक भारत पर शासन कर सके। अब समय आ गया है भारतवासी भाषा की इस शक्ति को समझें और भाषा के स्तर पर एकजुट हो विश्व में अपना परचम लहरायें क्योंकि यदि भूल गए हों तो याद दिला दूँ:

“हिंदी हैं हम वतन है हिंदुस्तान हमारा।”

हिंदी की देवनागरी लिपि का वैज्ञानिकता का गुण ही उसे अन्य भाषाओं से अलग और ऊँचे पायदान पर सुशोभित करता है।

किसी भी भाषा में उसकी संप्रेक्षणीयता का गुण और रोजगार के स्तर पर उसकी सफलता भी महत्वपूर्ण है। हिंदी भाषा के लिए वर्तमान समय में भी ऐसे बहुत से उद्योग किए जा रहे हैं जैसे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा द्वारा हिंदी भाषा में एम.बी.ए का पाठ्यक्रम आरंभ किया गया। इसी तरह ‘इकोनामिक टाइम्स’ और ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ जैसे अखबार हिंदी में प्रकाशित होने लगे हैं। रोजगार की दृष्टि से देखा जाए तो आखिर कितनी प्रतिशत नौकरियों में अंग्रेजी की अनिवार्यता है शायद 10% । हिंदी के ब्लॉगर की संख्या व कमाई देखें तो तकनीकी स्तर पर हिंदी का आधिपत्य बढ़ता दिखाई दे रहा है। साथ ही साथ तकनीकी विकास में भाषा की भूमिका रोजगार के नए स्वरूप की संभावना प्रदान करती है। केंद्र तथा विभिन्न राज्य सरकारों की पहल के कारण कई सामाजिक एवं साहित्यिक संस्थाएं हिंदी का एक लिंक भाषा के प्रसार के रूप में काम कर रही हैं। आज हिंदी का ज्ञान गैर हिंदी क्षेत्रों में भी फैल रहा है और हिंदी का सूरज चमकता दिखाई दे रहा है। केंद्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति में प्राथमिक कक्षाओं के स्तर पर मातृभाषा में पठन-पाठन एक सराहनीय पहल है, जो निश्चित रूप से हिंदी की स्थिति को मजबूत बनाने में सहयोग देगी।

    *****

5 thoughts on “हिंदी हैं हम”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top