सेहतमंद होने का अर्थ

एक प्रसिद्ध कहावत है “यदि आपको अभी अपने स्वास्थ्य की देखभाल करने का समय नहीं मिला है, तो आपको बाद में अपनी बीमारी के लिए समय निकालने की आवश्यकता होगी।”

निशांत रौनक

      हमारे जीवनकाल में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली मशीन है हमारा शरीर। अन्य सभी मशीनों का इस्तेमाल इसी मशीन पर निर्भर है। इसलिए इसको सही यानि स्वस्थ रखना किसी भी अन्य मशीन को सही रखने के लिए एक मौलिक पूर्व शर्त है।

      लेकिन स्वस्थ शरीर का वास्तव में क्या आशय है। वास्तव में जब कोई व्यक्ति शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से इस योग्य हो कि प्रकृति के सामान्य क्रम में जीवन का उपयोग कर सके, तभी वह पूर्ण स्वस्थ कहला सकता है। अर्थात स्वास्थ्य अनिवार्य रूप से शरीर और मस्तिष्क दोनों के स्वास्थ्य और संतुलन को प्रकट करता है। 

      चूँकि स्वस्थ शरीर और मस्तिष्क से ही हम धन, यश आदि का अर्जन कर सकते हैं। इसी को लक्ष्य कर के स्वास्थ्य को “धन (wealth)” कहा गया है। इसके बिना हम धन अर्जन तो नहीं ही कर सकते हैं, पर साथ ही पहले से जो हमारे पास होता है, उसे भी गवां देते है। फिर भी विडंबना यह है कि हम धन और यश आदि के अर्जन के पीछे अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा कर देते हैं। 

      जैसे हर व्यक्ति के विचार अलग-अलग होते है, वैसे ही हर व्यक्ति के शरीर की तासीर भी अलग-अलग प्रकार की होती है। तकनीकी भाषा में इनके लिए एंडोमॉर्फ, (Endomorphsयानिभारी शरीर), एक्टोमॉर्फ़ (ectomorph यानि दुबला-पतला शरीर) आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है। वह उपाय जो एंडोमॉर्फ शरीर के किसी व्यक्ति के लिए काम करेगा, वह हो सकता है कि एक्टोमॉर्फ़ के लिए काम नहीं करे। इसलिए अपने स्वयं के स्वास्थ्य की देखभाल करने की दिशा में पहला कदम तो यह जानना होगा कि आपका शरीर किस प्रकार का है।

      आयुकरण (ageing) यानि शरीर का वृद्ध होना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे शरीर के ऊत्तक अपनी क्षमता खोने लगते हैं। कोशिकाओं में विभाजन यानि वृद्धि-दर कम हो जाती है। परिणाम स्वरूप इसके अंगों की क्षमता भी कम होने लगती है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो सभी जीव और निर्जीव में समय के साथ होता है। यद्यपि आयुकरण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे रोका नहीं जा सकता है। लेकिन कुछ सामान्य प्रक्रियाओं/सावधानियों द्वारा इसके हानिकारक प्रभावों को थोड़ा कम और विलंबित किया जा सकता है।

ये प्रक्रियाएँ/सावधानियाँ ये हो सकती हैं:

  • 1. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें;
  • 2. हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि सामान्य, पर घातक बीमारियों के प्रति सावधान रहें;
  • 3. कम-से-कम 7-8 घंटे की अच्छी नींद जरूर लें।
  • 4. धूम्रपान और नशीली वस्तुओं का सेवन न करें।
  • 5. शरीर की तरह मस्तिष्क को भी सक्रिय रखें। इसे समय-समय पर चुनौती दें। कुछ-न-कुछ नया सीखते रहें।
  • 6. अपने स्वास्थ्य के अनुसार संतुलित आहार लें।

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